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Showing posts from October, 2024

करवा चौथ की शाम की पूजा कैसे करते हैं?

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करवा चौथ की शाम की पूजा कैसे करते हैं?    हिन्दू धर्म में करवाचौथ का बड़ा ही  महत्व है यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है यह व्रत हर सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीघार्यु के लिए करती है यह निर्जल व्रत रखा जाता है और शाम के समय पूजा करके व् चंद्र दर्शन के बाद ही पति के हाथो से ही पानी पीकर यह व्रत खोला जाता है करवाचौथ की शाम गणेश शिव और गौरा माता की पूजा की जाती है सुहागिन स्त्रियाँ सोलह श्रृंगार कर यह पूजा करती है  करवाचौथ की शाम को तैयार होकर पूजा भगवान गणेश जी शिव जी व् माता गौरा की पूजा के बाद करवा माता की भी कथा सुनी जाती है  मां पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें और मिट्टी के  करवा  में जल भर कर  पूजा  स्थान पर रखें। अब भगवान श्री गणेश, मां गौरी, भगवान शिव और चंद्र देव का ध्यान कर  करवा चौथ  व्रत की कथा सुनें। चंद्रमा की  पूजा  कर उन्हें अर्घ्य दें। फिर छलनी की ओट से चंद्रमा को देखें और उसके बाद अपने पति का चेहरा देखें।उसके बाद ही व्रत पूरा होता है और प्रभु से पति की मंगल की कामना की जा...

कार्तिक मास में तुलसी की पूजा क्यों की जाती है?

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  कार्तिक मास में तुलसी की पूजा क्यों की जाती है? कार्तिक मास भगवान् विष्णु का सबसे प्रिय महीना है इस माह में माता तुलसी की पूजा की जाती है जो भगवन विष्णु की सबसे बड़ी भक्त थी माता तुलसी की पूजा से भगवान् विष्णु का आशीर्वाद मिलता है जो भी स्त्री पुरूष  कार्तिक माह में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर तुलसी माता की पूजा करता है उसे किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है जो सुहागिन स्त्रियाँ इस पूजा को करती है उन पर माता तुलसी की  बनी रहती है   कार्तिक महीने में पूजा करने से धन यश वैभव व् भगवान् विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है  कार्तिक महीने में तुलसी पूजन करना विशेष तौर पर फलदायक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि  इस महीने पूरे विधि-विधान से तुलसी माता की पूजा अर्चना करने से भगवान श्री हरि विष्णु के साथ मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी व्यक्ति को मिल सकता है । इसलिए कार्तिक महीने में हर रोज सुबह के समय तुलसी महारानी को जल जरूर चढ़ाएं।ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है शालिग्राम भगवान् का आशीर्वाद भी मिलता है इस महीने में शालिग्राम भगवान् और तुलसी विवाह भी ...

शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?

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 शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए? आश्विन मास की पूर्णिमा को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता है पूर्णमासी का दिन सबसे शुभ दिन माना जाता है इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है जो लोग माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते है उनके धन के भंडार भरे रहते है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है इस दिन खीर बनाने की भी परम्परा है इस दिन खीर बनाकर चन्द्रमा की चांदनी में रखी जाती और पूर्णमासी के चाँद की रोशनी पड़ने से खीर अमृत समान हो जाती है शरद पूर्णिमा के दिन शिव पूजा करने वाले व्यक्ति को भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है  शरद पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर जल,दूध,बेलपत्र,अक्षत,फूल,और भी सामग्री अर्पित कर सकते है  पूजा के बाद  सुपारी पर लाल धागा लपेटकर उसको अक्षत, कुमकुम, पुष्प आदि से पूजन करके उसे तिजोरी में रखने से आपको को कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना होगा । इसके अलावा शरद पूर्णिमा की रात भगवान शिव को खीर का भोग लगाएं। खीर को पूर्णिमा वाली रात छत पर रखें। भोग लगाने के बाद उस खीर का प्रसाद ग्रहण करें इस दिन शिव पूजा से प्रभु की कृपा बनी रहती है  वास्तु दोष निवारण ...

मंगलवार को शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए

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मंगलवार को शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए भगवान् शिवजी की पूजा तो हर दिन ही कर सकते है मंगलवार को भी शिवजी की प्रिय वस्तुए चढ़ा सकते है प्रभु की पूजा के लिए जरुरी होता है जल,दूध,बेलपत्र,धतूरा,भस्म,फूल,इन वस्तुओ को चढ़ाने से शिव जी प्रसन्न होते है जिससे उनका आशीर्वाद मिलता है और मनचाहा वरदान भी मिलता है तथा सब दोषो से मुक्ति मिलती है ये सब शिवजी की कृपा होती है  मंगल की पूजा मंगल के लिए मंगलवार को शिवलिंग पर  लाल मसूर  चढ़ाएं। मंगल की पूजा शिवलिंग रूप में ही होती है। मंगलवार को शिवलिंग पर लाल गुलाब चढ़ाएं। बुधवार को बुध की पूजा करें बुध ग्रह के लिए हर बुधवार हरी मूंग का दान करें।  भगवान शिव-पार्वती और नंदी को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं.  बिल्व पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, और इलायची चढ़ाएं.  शाम के समय फिर से स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें. शहद या पंचामृत, लाल मसूर, लाल गुलाब, लाल गुलाल, लाल वस्त्र, गुड़ इन चीजों को चढ़ाने शिवजी की कृपा प्राप्त होती है  वास्तु दोष निवारण पूजा उज्जैन  में करवाने के लिए...

सोमवार के दिन भगवान् शिवजी को क्या चढ़ाए ?

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सोमवार के दिन भगवान् शिवजी को क्या चढ़ाए ? सोमवार का दिन भगवान् शिव का माना गया है सोमवार को शिवजी पर जल,दूध,बेलपत्र,धतूरा,भस्म,और भी सामग्री चढाई जाती है जिससे भगवान् भोलेनाथ प्रसन्न होते है सोमवार व्रत करने व् पूजा करने वाले व्यक्ति पर  शिवजी की कृपा बनी रहती है    सोमवार के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि सोमवार या फिर रोजाना पूजा के दौरान शिवलिंग पर  दही, घी, धतूरा, शहद, जल, भांग, चंदन और फल  समेत आदि चीजें अर्पित करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं,  शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाते समय शिव जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए.   शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, और शहद) चढ़ाना चाहिए.   शिवलिंग पर चंदन का त्रिपुंड लगाना चाहिए.   शिवलिंग पर फूलों की माला और बेलपत्र चढ़ाना चाहिए.   शिवलिंग पर वस्त्र और रुद्राक्ष से शृंगार करना चाहिए.   शिवलिंग पर दीपक जलाकर आरती करनी चाहिए.   शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए.   शिव जी को भोग लगाकर प्रसाद वितरण करना चाहिए. सोमवार के दिन इस विधिपूर्वक पूजा करने से भग...

पापाकुंशा एकादशी के दिन क्या कालसर्प दोष पूजा कर सकते है?

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पापाकुंशा एकादशी के दिन क्या कालसर्प दोष पूजा कर सकते है? एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है दशहरे यानि विजयदशमी के अगले दिन आने वाली ग्यारस को पापाकुंशा एकादशी कहते है इस दिन सभी पापो को दूर करने वाली एकादशी होती है इस दिन जो भी व्यक्ति पूजा या अनुष्ठान करता है उसके समस्त दोष दूर हो जाते है कालसर्प दोष हो या कोई भी दोष सभी से मुक्ति मिलती है व्रत करने वाले व्यक्ति को भगवान् विष्णु का आशीर्वाद मिलता है पापाकुंशा एकादशी के दिन कालसर्प दोष  पूजा की जा सकती है - इस दोष की पूजा के लिए किसी भी मंदिर या ज्योत्रिलिंग में पूजा करवा सकते है  पापांकुशा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है.   कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए,उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करना सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध है. कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए, घर में मोर पंख धारण किए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखनी चाहिए और उनकी पूजा करनी चाहिए.   कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए, रोज़ाना शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए.   कालसर्प दोष से मुक्ति पा...

शारदीय नवरात्रि में महागौरी माता की पूजा कैसे की जाती है?

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 शारदीय नवरात्रि में महागौरी माता की पूजा कैसे की जाती है? नवरात्री के दिनों में माता की पूजा का विशेष महत्व है माता का आठवां स्वरुप माता महागौरी का है कहते है इस दिन व्रत पूजन करने से सारे कष्टों  मुक्ति मिलती है और धन वैभव की कमी नहीं होती है विधि पूर्वक पूजा करने वाले भक्त को माता का आशीर्वाद मिलता है इस दिन कन्या पूजन भी कर सकते है  महागौरी माता की पूजा नवरात्री के आठवें दिन की जाती है इस दिन सुबह स्नान कर  स्वच्छ कपड़े पहनकर माता का व्रत रखा जाता है व्रत रखने वाले भक्त स्त्री हो या पुरुष सभी को पूजा करनी चाहिए   सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां  महागौरी  की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद मां  महागौरी  को सफेद रंग के वस्त्र धारण कराएं। इसके बाद माता  महागौरी  को सफेद फूल अर्पित करें और कुमकुम या रोली से तिलक करें।इस विधि से पूजा करने से माता प्रसन्न होती है और खुशहाली का आशीर्वाद देती है  वास्तु दोष निवारण पूजा उज्जैन  में करवाने के लिए,  पितृ दोष निवारण पूजा उज्जैन  में करवाने के लिए...

नवरात्रि के व्रत करने से क्या फल मिलता है?

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  नवरात्रि के व्रत करने से क्या फल मिलता है? हिन्दू धर्म में नवरात्री व्रत का बड़ा ही महत्व है हर व्यक्ति माता की पूजा आराधना करता है और वैसे तो नौ दिन व्रत का विधान है जो व्यक्ति माता की पूजा अर्चना करता है उस पर माता का आशीर्वाद बना रहता है घर में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है नवरात्री व्रत से आर्थिक मानसिक शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है व्रत पूजा करने वाले व्यक्ति के पास किसी भी चीज की कमी नहीं होती है और माता का आशीर्वाद पुरे घर परिवार पर रहता है  जो भक्त नवरात्री व्रत करते है उनको माता कभी निराश नहीं करती है जो भी व्यक्ति माता से अपनी मनोकामना करता है माता उसे पूरा करती है  नवरात्रि में व्रत रखने से  मन, तन और आत्मा शुद्ध होती है । नवरात्रि के दिनों में 9 दिनों तक व्रत रखकर हम अपने मन, तन और आत्मा का शुद्धिकरण कर सकते हैं। इन दिनों में व्रत करने से विशेष फल मिलता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इन दिनों व्रत रखने से मां प्रसन्न होती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। जो व्यक्ति संतान  कामना करता है रोगी रोग मुक्ति की निर्धन व्यक्ति को धन की कमी नहीं ...